राजस्थान में विकलांगता प्रमाण पत्र, जिसे दिव्यांगजन प्रमाण पत्र भी कहा जाता है, केवल एक सरकारी दस्तावेज से कहीं बढ़कर है। यह लाखों विकलांग व्यक्तियों के लिए सम्मान, पहचान और समावेशी समाज में भागीदारी का प्रतीक है। यह प्रमाण पत्र उन्हें उन सभी अधिकारों और सुविधाओं तक पहुँचने का अधिकार देता है जो भारत सरकार और राजस्थान सरकार द्वारा उनके सशक्तिकरण और कल्याण के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इस व्यापक लेख में, हम विकलांगता प्रमाण पत्र के महत्व, इसके विस्तृत लाभों, राजस्थान में इसके लिए आवेदन करने की संपूर्ण प्रक्रिया (ऑनलाइन और ऑफलाइन), आवश्यक दस्तावेजों और इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
विकलांगता प्रमाण पत्र का महत्व
विकलांगता प्रमाण पत्र एक आधिकारिक दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति की विकलांगता के प्रकार, प्रकृति और प्रतिशत को प्रमाणित करता है। यह विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत अनिवार्य है और सरकारी योजनाओं व सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्राथमिक मानदंड के रूप में कार्य करता है। इसका महत्व इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- पहचान और वैधता: यह विकलांग व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर पहचान प्रदान करता है, जिससे उन्हें समाज में अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए उचित सम्मान और ध्यान मिलता है।
- अधिकारों का संरक्षण: यह अधिनियमित कानूनों के तहत विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है, उन्हें भेदभाव, उत्पीड़न और उपेक्षा से बचाता है।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: यह शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, परिवहन, और वित्तीय सहायता जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं और सब्सिडी तक पहुँच का मुख्य आधार है।
- डेटा संग्रह: यह सरकार को विकलांग व्यक्तियों की संख्या, उनके प्रकार और आवश्यकताओं का डेटा संग्रह करने में मदद करता है, जिससे बेहतर नीतियां और कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।
- समावेशी विकास: यह विकलांग व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में लाने और उन्हें सक्रिय भागीदार बनाने में मदद करता है, जिससे एक सच्चा समावेशी समाज बनता है।
विकलांगता प्रमाण पत्र के विस्तृत लाभ
विकलांगता प्रमाण पत्र धारक व्यक्तियों को मिलने वाले लाभ बहुआयामी होते हैं, जो उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता करते हैं।
1. शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रावधान
शिक्षा हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, और विकलांगता प्रमाण पत्र इसे विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाता है:
- संस्थानों में आरक्षण: देश भर के सरकारी और कुछ निजी शैक्षणिक संस्थानों (स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों) में प्रवेश के लिए एक निर्धारित प्रतिशत सीटें (आमतौर पर 3% से 5%) आरक्षित होती हैं। यह उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देता है।
- छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता: विकलांग छात्रों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न विशेष छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। ये छात्रवृत्तियां ट्यूशन फीस, पुस्तकों, छात्रावास शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों को कवर करने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही ‘टॉप क्लास एजुकेशन फॉर स्टूडेंट्स विथ डिसेबिलिटीज’ योजना।
- परीक्षा में सुविधाएं: शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में विकलांग छात्रों को अतिरिक्त समय (compensatory time) दिया जाता है, जो उन्हें प्रश्नों को हल करने और उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करता है। साथ ही, उन्हें अपनी आवश्यकतानुसार लेखक (scribe) की सुविधा भी मिलती है, यदि वे स्वयं लिखने में अक्षम हों।
- विशेष शिक्षण सामग्री और उपकरण: ब्रेल लिपि में किताबें, ऑडियो सामग्री, बड़े प्रिंट वाली किताबें, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और अन्य सहायक तकनीकें उन्हें सीखने की प्रक्रिया में सहायता करती हैं।
2. रोजगार और आजीविका के अवसर
आत्मनिर्भरता के लिए रोजगार महत्वपूर्ण है, और विकलांगता प्रमाण पत्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण: केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), और स्वायत्त निकायों में समूह ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ पदों पर विकलांग व्यक्तियों के लिए पद (आमतौर पर 4%) आरक्षित होते हैं। यह उन्हें स्थायी और सुरक्षित रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
- आयु में छूट: सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले विकलांग उम्मीदवारों को उच्च आयु सीमा में छूट मिलती है, जिससे उन्हें आवेदन करने के लिए अधिक अवसर मिलते हैं।
- स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन: विभिन्न सरकारी योजनाएं, जैसे कि राष्ट्रीय विकलांग वित्त और विकास निगम (NHFDC) द्वारा प्रदान किए जाने वाले रियायती ऋण और सब्सिडी, विकलांग व्यक्तियों को अपना व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
- कौशल विकास और प्रशिक्षण: सरकार द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों में विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष बैच और अनुकूलित प्रशिक्षण मॉड्यूल प्रदान किए जाते हैं, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ती है।
3. परिवहन और गतिशीलता में रियायतें
गतिशीलता और पहुँच (accessibility) विकलांग व्यक्तियों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे प्रमाण पत्र के माध्यम से कम किया जाता है:
- रेलवे यात्रा में छूट: भारतीय रेलवे विकलांग व्यक्तियों और उनके साथ यात्रा करने वाले एक परिचारक के लिए किराए में भारी छूट (स्लीपर और एसी क्लास में 75% तक) प्रदान करता है।
- बस यात्रा में छूट: राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की बसों में भी विकलांग व्यक्तियों को किराए में छूट (आमतौर पर 50% से 100% तक) मिलती है।
- हवाई यात्रा में छूट: कुछ एयरलाइंस और केंद्रीय योजनाएं घरेलू उड़ानों में विकलांग व्यक्तियों को किराए में रियायत प्रदान करती हैं।
- विशेष वाहन सुविधा: कुछ राज्यों में, विकलांग व्यक्तियों द्वारा खरीदे गए विशेष रूप से अनुकूलित वाहनों पर पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में छूट मिलती है।
- पार्किंग सुविधा: कुछ सार्वजनिक स्थानों और इमारतों में विकलांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित पार्किंग स्थल होते हैं।
4. स्वास्थ्य सेवा और सहायक उपकरण
स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता जीवन की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है:
- मुफ्त/रियायती चिकित्सा उपचार: सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त या रियायती दरों पर चिकित्सा परामर्श, जांच, उपचार और दवाएं मिलती हैं।
- सहायक उपकरणों का वितरण: केंद्र सरकार की ADIP (Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances) योजना और राज्य सरकारों की योजनाओं के तहत, आवश्यक सहायक उपकरण (जैसे व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ब्रेल किट, स्मार्टकेन्स) मुफ्त या सब्सिडी पर प्रदान किए जाते हैं।
- स्वास्थ्य बीमा: कुछ सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाएं, जैसे आयुष्मान भारत, विकलांग व्यक्तियों को प्राथमिकता और विशेष कवरेज प्रदान करती हैं।
5. वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा
वित्तीय स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना विकलांग व्यक्तियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है:
- पेंशन योजनाएं: राजस्थान सरकार द्वारा विकलांगजन पेंशन योजना चलाई जाती है, जिसके तहत पात्र विकलांग व्यक्तियों को मासिक वित्तीय सहायता (पेंशन) प्रदान की जाती है। यह पेंशन उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
- आयकर में छूट: आयकर अधिनियम की धारा 80U विकलांग व्यक्ति को स्वयं के लिए और धारा 80DD विकलांग आश्रितों के लिए आयकर में विशेष कटौती (deductions) का लाभ उठाने की अनुमति देती है, जिससे उनकी कर योग्य आय कम हो जाती है।
- आवास योजनाएं: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी केंद्रीय और राज्य-विशिष्ट आवास योजनाओं में विकलांग व्यक्तियों को घर आवंटन में प्राथमिकता दी जाती है। कुछ मामलों में उन्हें सब्सिडी या कम ब्याज दरों पर ऋण भी मिलते हैं।
- राशन कार्ड में प्राथमिकता: कुछ राज्यों में विकलांग व्यक्तियों को राशन कार्ड प्राप्त करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से राशन प्राप्त करने में प्राथमिकता मिलती है।
- टेलीफोन/मोबाइल बिल में छूट: कुछ सेवा प्रदाता विकलांग व्यक्तियों को टेलीफोन या मोबाइल बिल में विशेष रियायतें देते हैं।
6. कानूनी सुरक्षा और मानवाधिकार
विकलांगता प्रमाण पत्र कानूनी रूप से उनके अधिकारों की पुष्टि करता है:
- कानूनी मान्यता: विकलांगता प्रमाण पत्र विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत उनके अधिकारों को कानूनी मान्यता देता है। यह अधिनियम विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनकी रक्षा करने और उन्हें सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।
- भेदभाव के खिलाफ संरक्षण: यह प्रमाण पत्र उन्हें रोजगार, शिक्षा, सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच और अन्य क्षेत्रों में होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- न्यायिक सहायता: यदि किसी विकलांग व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उन्हें कानूनी सहायता और सलाह प्राप्त करने में आसानी होती है।
राजस्थान में विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कैसे करें
राजस्थान में विकलांगता प्रमाण पत्र (Unique Disability ID – UDID कार्ड अब केंद्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है) प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। आप इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदन करने के लिए पात्रता
- आवेदक राजस्थान का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक को विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत परिभाषित किसी भी प्रकार की विकलांगता से ग्रस्त होना चाहिए। अधिनियम में 21 प्रकार की विकलांगताओं को सूचीबद्ध किया गया है, जैसे लोकोमोटर विकलांगता (शारीरिक अक्षमता), दृष्टिबाधितता, श्रवणबाधितता, बौद्धिक विकलांगता, मानसिक बीमारी, स्वलीनता (ऑटिज्म), सेरिब्रल पाल्सी, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, सिकल सेल रोग, तेजाब हमला पीड़ित, पार्किंसन रोग, बौनापन, मांसपेशियों का डिस्ट्रॉफी, आदि।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदन करने से पहले निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखना अनिवार्य है:
- पहचान प्रमाण (Identity Proof):
- आधार कार्ड (अनिवार्य): यह सबसे महत्वपूर्ण पहचान प्रमाण है।
- वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस (इनमें से कोई एक)।
- निवास प्रमाण (Address Proof):
- आधार कार्ड (यदि इसमें वर्तमान पता है)।
- राशन कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)।
- बिजली का बिल, पानी का बिल (3 महीने से पुराना न हो)।
- पासपोर्ट आकार के रंगीन फोटो: आवेदक के हाल ही के 2-3 पासपोर्ट आकार के फोटो।
- विकलांगता का चिकित्सा प्रमाण पत्र (Medical Certificate of Disability – यदि उपलब्ध हो):
- यदि आपके पास पहले से किसी सरकारी अस्पताल के अधिकृत चिकित्सक या चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी कोई पुराना विकलांगता प्रमाण पत्र है, तो उसकी कॉपी संलग्न करें।
- यदि नहीं है, तो आवेदन के बाद आपकी चिकित्सा जांच की जाएगी।
- बैंक पासबुक की कॉपी: योजना के तहत वित्तीय लाभ सीधे आवेदक के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं, इसलिए बैंक खाता संख्या और IFSC कोड वाली पासबुक के पहले पृष्ठ की कॉपी।
- जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate – यदि लागू हो): यदि आप अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं, तो इसका प्रमाण पत्र।
- आय प्रमाण पत्र (Income Certificate – यदि लागू हो): कुछ आय-आधारित योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आवश्यक हो सकता है।
आवेदन प्रक्रिया: चरण-दर-चरण गाइड
आप राजस्थान में विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं।
1. ऑनलाइन आवेदन (राजस्थान SSO पोर्टल के माध्यम से)
यह तरीका सुविधाजनक और समय बचाने वाला है, और अधिकांश नए आवेदन इसी माध्यम से किए जाते हैं। UDID (Unique Disability ID) कार्ड के लिए भी आवेदन इसी प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।
- राजस्थान SSO पोर्टल पर पंजीकरण/लॉगिन करें:
- सबसे पहले, राजस्थान सरकार के SSO (Single Sign On) पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- यदि आप नए उपयोगकर्ता हैं, तो “Register” बटन पर क्लिक करके अपना SSO ID बनाएं। आप जन आधार, भामाशाह, आधार, या गूगल अकाउंट का उपयोग करके पंजीकरण कर सकते हैं। आधार आधारित पंजीकरण सबसे पसंदीदा विकल्प है।
- यदि आपके पास पहले से SSO ID है, तो अपनी SSO ID और पासवर्ड डालकर “Login” करें।
- सही ऐप का चुनाव करें:
- लॉगिन करने के बाद, आपको डैशबोर्ड पर विभिन्न सरकारी ऐप्स दिखेंगी। “Citizen Apps (G2C)” सेक्शन में जाएं और “SJMS Portal” (सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की सेवाएँ) ऐप खोजें और उस पर क्लिक करें। यह ऐप आपको विकलांगता प्रमाण पत्र सहित SJED की अन्य सेवाओं तक पहुँचाएगी।
- विकलांगता प्रमाण पत्र आवेदन चुनें:
- SJMS Portal के भीतर, आपको “विकलांगता प्रमाण पत्र आवेदन” (Disability Certificate Application) या “दिव्यांगजन प्रमाण पत्र आवेदन” का विकल्प मिलेगा। इस पर क्लिक करें।
- आवेदन फॉर्म भरें:
- एक विस्तृत ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खुलेगा। इसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्म तिथि, पता, लिंग, श्रेणी, धर्म, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि सावधानीपूर्वक और सही-सही भरें।
- विकलांगता का विवरण: अपनी विकलांगता के प्रकार (जैसे लोकोमोटर, दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, आदि) और यदि पहले से कोई प्रतिशत ज्ञात है, तो उसका उल्लेख करें। यदि आपके पास पहले से कोई चिकित्सा प्रमाण पत्र है, तो उसका विवरण दर्ज करें।
- शैक्षणिक और व्यावसायिक विवरण: अपनी शैक्षणिक योग्यता और यदि कोई है तो व्यावसायिक अनुभव का विवरण दें।
- बैंक विवरण: संबंधित योजनाओं के तहत वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपना बैंक खाता संख्या और IFSC कोड दर्ज करें।
- दस्तावेज अपलोड करें:
- निर्दिष्ट स्थानों पर सभी आवश्यक दस्तावेजों (पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, फोटो, बैंक पासबुक की कॉपी, पुराना चिकित्सा प्रमाण पत्र यदि कोई हो) को स्कैन करके अपलोड करें। सुनिश्चित करें कि अपलोड किए गए दस्तावेज स्पष्ट और पठनीय हों। फाइल का आकार और प्रारूप (जैसे PDF, JPEG) निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।
- फॉर्म सबमिट करें:
- सभी जानकारी भरने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद, एक बार पूरी जानकारी की समीक्षा करें। यदि सब कुछ सही है, तो “Submit” बटन पर क्लिक करें।
- सफलतापूर्वक सबमिट होने पर, आपको एक आवेदन संदर्भ संख्या (Application Reference Number) या रसीद संख्या प्राप्त होगी। इसे भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखें।
- चिकित्सा जांच का अपॉइंटमेंट और प्रक्रिया:
- आवेदन जमा होने के बाद, आपका आवेदन संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के पास समीक्षा के लिए जाएगा।
- आपको एक विशिष्ट तिथि और समय पर जिले के मुख्य चिकित्सालय या अधिकृत चिकित्सा बोर्ड के सामने शारीरिक जांच के लिए बुलाया जाएगा। यह जानकारी आपको SSO पोर्टल पर आपके डैशबोर्ड पर, या SMS/ईमेल के माध्यम से मिल सकती है।
- चिकित्सा बोर्ड में विशेषज्ञ डॉक्टर (जैसे अस्थि रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक आदि) आपकी विकलांगता का विस्तृत आकलन करेंगे और उसकी गंभीरता (प्रतिशत) निर्धारित करेंगे।
- उनकी रिपोर्ट के आधार पर, आपका विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
- आवेदन की स्थिति ट्रैक करें और प्रमाण पत्र डाउनलोड करें:
- आप अपनी आवेदन संदर्भ संख्या का उपयोग करके SSO पोर्टल पर या सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
- प्रमाण पत्र जारी होने के बाद, आप उसे SSO पोर्टल से डाउनलोड और प्रिंट कर सकते हैं। अब UDID कार्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध होते हैं।
2. ऑफलाइन आवेदन
यह तरीका उन लोगों के लिए उपयुक्त है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है या जो ऑनलाइन आवेदन करने में सहज नहीं हैं:
- आवेदन फॉर्म प्राप्त करें:
- अपने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय, जिला अस्पताल, या जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (SJED) कार्यालय से विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन फॉर्म प्राप्त करें। ये फॉर्म अक्सर नि:शुल्क उपलब्ध होते हैं।
- फॉर्म भरें और दस्तावेज संलग्न करें:
- फॉर्म को ध्यानपूर्वक और स्पष्ट रूप से नीले या काले पेन से भरें।
- ऊपर बताए गए सभी आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी फॉर्म के साथ संलग्न करें। सुनिश्चित करें कि फोटोकॉपी स्पष्ट हों और स्वयं द्वारा सत्यापित हों (self-attested)।
- आवेदन जमा करें:
- भरे हुए फॉर्म और सभी संलग्न दस्तावेजों को संबंधित कार्यालय (आमतौर पर CMHO कार्यालय या जिला SJED कार्यालय में निर्दिष्ट काउंटर) में जमा करें।
- फॉर्म जमा करने पर आपको एक रसीद मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखें।
- चिकित्सा बोर्ड द्वारा जांच:
- फॉर्म जमा होने के बाद, आपको एक विशिष्ट तिथि पर जिला अस्पताल में गठित चिकित्सा बोर्ड के सामने उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया जाएगा। यह बोर्ड विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों (जैसे अस्थि रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आदि) से मिलकर बना होता है।
- बोर्ड आपकी विकलांगता का शारीरिक मूल्यांकन करेगा और विकलांगता का प्रकार और प्रतिशत निर्धारित करेगा।
- प्रमाण पत्र प्राप्त करें:
- चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर, आपका विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
- आपको सूचित किया जाएगा कि प्रमाण पत्र कब और कहाँ से प्राप्त करना है (आमतौर पर उसी कार्यालय से जहाँ आपने आवेदन जमा किया था)। आपको अपनी रसीद दिखानी पड़ सकती है।
- अब, कई जिलों में ऑफलाइन आवेदन के बाद भी UDID कार्ड प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, जिससे आपका प्रमाण पत्र ऑनलाइन भी उपलब्ध हो सके।
महत्वपूर्ण बातें और सुझाव
- सटीक और सत्य जानकारी: आवेदन फॉर्म में सभी जानकारी सही और सटीक भरें। किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी देने से आपका आवेदन रद्द हो सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
- दस्तावेजों की तैयारी: आवेदन करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां और उनकी फोटोकॉपी तैयार रखें। मूल प्रतियां सत्यापन के लिए आवश्यक हो सकती हैं।
- चिकित्सा जांच में सहयोग: चिकित्सा बोर्ड द्वारा बुलाए जाने पर निर्धारित समय पर उपस्थित हों। जांच के दौरान डॉक्टरों के साथ पूरा सहयोग करें और अपनी स्थिति के बारे में सही जानकारी प्रदान करें।
- आवेदन स्थिति की निगरानी: यदि आपने ऑनलाइन आवेदन किया है, तो नियमित रूप से SSO पोर्टल पर या संबंधित विभाग की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति की जांच करते रहें।
- सहायता लेना: यदि आपको आवेदन प्रक्रिया में कोई कठिनाई आती है या आप इसे स्वयं करने में असमर्थ हैं, तो आप अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र, जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग कार्यालय, या विकलांग व्यक्तियों के लिए काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से मदद ले सकते हैं। ई-मित्र केंद्र पर न्यूनतम शुल्क पर आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
- UDID कार्ड: भारत सरकार ने “यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID)” प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के लिए एक एकल पहचान पत्र जारी करना है। राजस्थान में भी इसे लागू किया जा रहा है। एक बार UDID कार्ड जारी हो जाने पर, यह सभी प्रकार के लाभों के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा और बार-बार विभिन्न प्रमाण पत्र ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह एक डिजिटल कार्ड है जिसमें विकलांगता से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह होती है।
राजस्थान में विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करना विकलांग व्यक्तियों के लिए सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठाने में मदद करता है, बल्कि उन्हें समाज में समान अवसर और सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी प्रदान करता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों आवेदन प्रक्रियाओं के माध्यम से, राजस्थान सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि विकलांग व्यक्ति आसानी से इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को प्राप्त कर सकें। यह प्रमाण पत्र वास्तव में एक ऐसे समावेशी राजस्थान के निर्माण की नींव है जहाँ हर व्यक्ति, उसकी क्षमताओं और चुनौतियों के बावजूद, गरिमा और सम्मान के साथ अपना जीवन जी सके। यह एक ऐसा कदम है जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को व्यवहार में लाता है।